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Showing posts from November, 2025

जेनिटिक बीमारी में हेल्दी डायट और एक्सरसाइज से कैसे पाएं मजबूत शरीर

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 जेनिटिक बीमारी क्या होती है? जेनिटिक बीमारी वह बीमारी होती है जो माता-पिता से हमारे डीएनए या जीन के जरिए मिलती है। ये बीमारियाँ जन्म से हो सकती हैं या कभी-कभी जीवन के बाद भी दिखाई देती हैं। जीन शरीर के हर अंग और कार्य को नियंत्रित करते हैं, इसलिए इनके बदलाव से शरीर पर असर पड़ सकता है। क्या डायट से जेनिटिक बीमारी कम हो सकती है? डायट सीधे जीन को बदल नहीं सकती, लेकिन सही खाना खाने से शरीर मजबूत रहता है और बीमारी के असर कम हो सकते हैं। विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और फाइबर वाला खाना शरीर की रोग लड़ने की क्षमता बढ़ाता है। यह शरीर को स्वस्थ रखकर जीन से प्रभावित होने वाले लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है। एक्सरसाइज से कैसे मदद मिलती है? एक्सरसाइज हड्डियों, मांसपेशियों और दिल-दिमाग को मजबूत बनाती है। यह शरीर में खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाती है, जिससे अंग बेहतर काम करते हैं। हल्की और नियमित एक्सरसाइज शरीर में स्टैमिना बढ़ाती है और बीमारी के असर कम करती है। कौन-कौन सी जेनिटिक बीमारियों में डायट मदद कर सकती है? डायट से सिकल स...

हंटिंगटन रोग: शुरुआती संकेत जिन्हें जानना ज़रूरी है

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 शुरुआती संकेत क्या होते हैं हंटिंगटन डिज़ीज़ के? हंटिंगटन डिज़ीज़ के शुरुआती संकेत धीरे-धीरे दिखाई देते हैं, जिनमें सबसे पहले मूवमेंट और व्यवहार में बदलाव शामिल होते हैं। व्यक्ति को बोलने, चलने या हाथ-पैर का नियंत्रण रखने में कठिनाई होने लगती है। चेहरा, हाथ या शरीर के हिस्सों में अनियंत्रित झटके आने शुरू हो जाते हैं, जिन्हें कोरिया मूवमेंट कहा जाता है। याददाश्त कमजोर होने लगती है और साधारण बातें भी याद रखने में समस्या होती है। शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय के साथ बढ़ते जाते हैं। हंटिंगटन डिज़ीज़ में मूवमेंट से जुड़े शुरुआती लक्षण क्या होते हैं रोग की शुरुआती अवस्था में शरीर अपने आप हिलना या कांपना शुरू कर देता है, जिसे व्यक्ति रोक नहीं पाता। चलने में असंतुलन, कदम लड़खड़ाना और बार-बार गिरने की संभावना बढ़ जाती है। हाथों से चीजें पकड़ना मुश्किल हो जाता है और छोटे काम जैसे लिखना या बटन लगाना कठिन लगने लगते हैं। चेहरा और गर्दन अचानक झटके के साथ हिल सकते हैं। धीरे-धीरे व्यक्ति अपने शरीर पर नियंत्रण खोने लगता है। हंटिंगटन ...

Tay–Sachs: जन्म से पहले पहचानी जाने वाली घातक बीमारी

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  Tay–Sachs Disease क्या है? Tay–Sachs एक बहुत ही गंभीर और दुर्लभ आनुवांशिक (genetic) बीमारी है जो ज़्यादातर बच्चों में पैदा होने के कुछ समय बाद ही दिखाई देने लगती है यह बीमारी शरीर के nervous system यानी दिमाग और nerves को धीरे–धीरे खराब कर देती है इस बीमारी में शरीर में Hex-A (Hexosaminidase A) नाम का एक enzyme नहीं बनता या बहुत कम बनता है यह enzyme दिमाग की कोशिकाओं से GM2 ganglioside नाम के fat जैसे पदार्थ को साफ करने का काम करता है लेकिन जब यह enzyme नहीं बनता तो यह fat दिमाग की cells में जमा होता जाता है Tay–Sachs Disease क्यों होती है? यह बीमारी parents से बच्चे में आती है यानी यह genetic बीमारी है अगर माँ और बाप दोनों के genes में यह defect छुपा हुआ हो और दोनों मिल जाएँ तभी बच्चे को यह बीमारी होती है इसका मतलब parents बिल्कुल normal हो सकते हैं पर वे carrier होते हैं और खुद को पता भी नहीं होता अगर दोनों carriers हों तो: 25% chance कि बच्चा Tay–Sachs से बीमार होगा 50% chance कि बच्चा carrier होगा 25% chance कि बच्...

Charcot-Marie-Tooth रोग क्या है?

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 Charcot-Marie-Tooth रोग क्या होता है? Charcot-Marie-Tooth (CMT) एक आनुवंशिक (genetic) रोग है जो नसों को प्रभावित करता है। यह उन नसों को नुकसान पहुँचाता है जो मांसपेशियों और शरीर के अंगों की हरकत को नियंत्रित करती हैं। यह मुख्य रूप से पैरों, टांगों, हाथों और बाहों की नसों को प्रभावित करता है। धीरे-धीरे मांसपेशियों की ताकत और संतुलन कम होने लगता है। यह बीमारी समय के साथ बढ़ती है लेकिन आमतौर पर जानलेवा नहीं होती। इस बीमारी का नाम Charcot-Marie-Tooth क्यों रखा गया? इस रोग का नाम तीन वैज्ञानिकों Jean-Martin Charcot, Pierre Marie और Howard Henry Tooth के नाम पर रखा गया। उन्होंने 1886 में इस बीमारी का वर्णन पहली बार किया था। यह न्यूरोलॉजी की सबसे आम आनुवंशिक बीमारियों में से एक है। इन वैज्ञानिकों ने पाया कि यह रोग नसों के क्षरण (degeneration) से जुड़ा है। इसलिए इस बीमारी को Charcot-Marie-Tooth disease कहा गया। Charcot-Marie-Tooth रोग किस कारण से होता है? यह रोग जीन (gene) में होने वाले बदलाव या mutation से होता है। यह बदलाव मात...

सिस्टिक फाइब्रोसिस क्या है? कारण, लक्षण, इलाज और पूरी जानकारी/

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सिस्टिक फाइब्रोसिस क्या है? सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis) एक आनुवंशिक (genetic) बीमारी है जो फेफड़ों (lungs), पाचन तंत्र (digestive system), और अन्य अंगों को प्रभावित करती है। इस बीमारी में शरीर में बनने वाला म्यूकस (बलगम) बहुत गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है, जिससे यह फेफड़ों की नलियों को बंद कर देता है। इससे सांस लेने में कठिनाई होती है और बार-बार संक्रमण (infection) होने लगता है। यह बीमारी CFTR जीन में बदलाव (mutation) के कारण होती है, जो शरीर में नमक और पानी के संतुलन को नियंत्रित करता है। यह समस्या जन्म से ही मौजूद रहती है और धीरे-धीरे लक्षण दिखने लगते हैं। क्या सिस्टिक फाइब्रोसिस आनुवंशिक बीमारी है? हाँ, सिस्टिक फाइब्रोसिस पूरी तरह आनुवंशिक बीमारी है। इसका मतलब है कि यह माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से आती है। अगर दोनों माता-पिता CFTR जीन के दोषपूर्ण रूप को लेकर चलते हैं, तो बच्चे में इस बीमारी के होने की संभावना अधिक होती है। सिस्टिक फाइब्रोसिस के मुख्य लक्षण क्या हैं? लगातार खांसी रहना और बलगम निकलना सांस लेने में कठिनाई या सांस फूलन...